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राजा किसान और नगर (Kings, Farmers and Towns) | Class 12 History Chapter 2 Notes in Hindi | NCERT CBSE

 

1. प्रिंसेप और पियदस्सी 📜

  • 1830 के दशक में जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि को पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
  • उन्होंने अभिलेखों और सिक्कों का अध्ययन किया।
  • कई अभिलेखों मेंपियदस्सीनाम मिला।
  • बाद में पता चला कि यह सम्राट अशोक का ही नाम था।
  • इस खोज से प्राचीन भारतीय इतिहास को समझने में बड़ी मदद मिली।

अभिलेख ✍️

  • अभिलेख पत्थर, धातु या अन्य कठोर सतहों पर लिखे गए लेख होते हैं।
  • इनमें राजाओं के आदेश, दान, धार्मिक बातें और प्रशासनिक जानकारी लिखी जाती थी।
  • अभिलेख इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

2. प्रारंभिक राज्य 👑

2.1 महाजनपद

  • छठी शताब्दी .पू. में भारत में कई बड़े राज्य विकसित हुए।
  • इन्हें महाजनपद कहा गया।
  • बौद्ध और जैन ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
  • इनमें मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बनकर उभरा।

🏛️ महाजनपदों की विशेषताएँ

  • अधिकतर महाजनपदों की अपनी राजधानी होती थी।
  • कई राज्यों में राजा शासन करते थे।
  • कुछ राज्यों में गण या संघ व्यवस्था थी, जहाँ कई लोग मिलकर शासन करते थे।
  • राज्यों को सेना और प्रशासन चलाने के लिए करों की आवश्यकता होती थी।

⚔️ कर और सेना

  • किसान, व्यापारी और शिल्पकार कर देते थे।
  • इन्हीं करों से सेना और प्रशासन चलता था।

2.2 सोलह महाजनपदों में प्रथम : मगध 🌟

  • मगध (आधुनिक बिहार) सबसे शक्तिशाली राज्य बना।

📌 मगध की शक्ति के कारण

1️ उपजाऊ भूमि

  • गंगा के मैदान की भूमि बहुत उपजाऊ थी।

2️ लौह अयस्क की उपलब्धता

  • यहाँ लोहे की खदानें पास में थीं।
  • लोहे के हथियार और औजार आसानी से बनाए जाते थे।

3️ हाथियों की उपलब्धता 🐘

  • जंगलों में हाथी मिलते थे, जो सेना में उपयोगी थे।

4️ सक्षम शासक 👑

  • बिंबिसार, अजातशत्रु और महापद्म नंद जैसे शासकों ने मगध को मजबूत बनाया।

🏙️ राजधानी

  • प्रारंभिक राजधानी राजगीर थी।
  • बाद में राजधानी पाटलिपुत्र बनी।

3. एक आरंभिक साम्राज्य 🌍

  • मगध के विकास के साथ मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ।
  • चंद्रगुप्त मौर्य ने इसकी स्थापना की।
  • अशोक मौर्य साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक था।

3.1 इतिहासकारों के लिए अभिलेखों का महत्व 📖

  • मौर्य साम्राज्य के बारे में जानकारी अभिलेखों, साहित्य और विदेशी यात्रियों के वर्णनों से मिलती है।
  • अशोक के अभिलेख सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।
  • इन अभिलेखों में अशोक की नीतियों और धम्म का वर्णन मिलता है।

अशोक का धम्म

  • बड़ों का सम्मान
  • सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता
  • सेवकों और दासों के साथ अच्छा व्यवहार
  • हिंसा कम करने पर जोर

3.2 साम्राज्य का शासन 🏛️

  • मौर्य साम्राज्य बहुत विशाल था।
  • शासन चलाने के लिए प्रशासनिक केंद्र बनाए गए।
  • साम्राज्य में सड़कें और संचार व्यवस्था विकसित की गई।
  • अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी।

👮 प्रमुख अधिकारी

  • कर संग्रह
  • न्याय व्यवस्था
  • सुरक्षा व्यवस्था
  • व्यापार और शिल्प पर नियंत्रण

स्रोत 1 : सम्राट के अधिकारी 👨‍💼

  • साम्राज्य में विभिन्न प्रकार के अधिकारी नियुक्त किए जाते थे।
  • वे व्यापार, शिल्प और कर व्यवस्था की देखरेख करते थे।
  • अधिकारी जनता और राज्य के बीच संपर्क का कार्य करते थे।

3.3 मौर्य साम्राज्य कितना महत्वपूर्ण था?

  • मौर्य साम्राज्य भारत का पहला विशाल साम्राज्य माना जाता है।
  • अशोक के अभिलेख पूरे उपमहाद्वीप में मिले हैं।
  • इससे पता चलता है कि उनका प्रभाव बहुत व्यापक था।
  • इतिहासकारों के लिए मौर्य काल भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण चरण है।

4. राजत्व के नवीन सिद्धांत 👑

4.1 दक्षिण के राजा और सरदार ⚔️

  • दक्षिण भारत में कई शक्तिशाली सरदार और शासक उभरे।
  • तमिल संगम साहित्य में इनके बारे में जानकारी मिलती है।

🛡️ सरदार की विशेषताएँ

  • युद्ध में नेतृत्व करना
  • लोगों को सुरक्षा देना
  • उपहार बाँटना
  • अपने समर्थकों को भोजन और धन देना

📚 संगम साहित्य

  • संगम ग्रंथ दक्षिण भारत के समाज और राजनीति की जानकारी देते हैं।

स्रोत 2 : सेना के लिए हाथी पकड़ना 🐘

  • हाथियों का उपयोग युद्ध में किया जाता था।
  • जंगलों से हाथी पकड़कर सेना के लिए प्रशिक्षित किए जाते थे।
  • हाथी प्राचीन सेनाओं की शक्ति का महत्वपूर्ण भाग थे।

4.2 वैदिक राजा 🔥

  • कई शासक वैदिक यज्ञों द्वारा अपनी शक्ति दिखाते थे।
  • अश्वमेध यज्ञ सबसे प्रसिद्ध था।
  • यज्ञों के माध्यम से राजा अपनी श्रेष्ठता साबित करते थे।

🐎 अश्वमेध यज्ञ

  • एक घोड़े को स्वतंत्र छोड़ा जाता था।
  • जहाँ-जहाँ घोड़ा जाता, वहाँ के शासकों को अधीनता स्वीकार करनी पड़ती थी।
  • यह राजा की शक्ति का प्रतीक था।

स्रोत 3 : पाण्ड्य सरदार सेमगुट्टुवन की यात्रा 🚶‍♂️

  • संगम साहित्य में सरदारों की यात्राओं और उपहारों का वर्णन मिलता है।
  • लोग सरदारों को भोजन, पशु और अन्य वस्तुएँ भेंट करते थे।
  • इससे उस समय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता चलता है।

5. बदलता हुआ देहात 🌾

5.1 जनता से राज की छवि 👑

  • इतिहासकार यह जानना चाहते थे कि जनता अपने राजा के बारे में क्या सोचती थी।
  • इसके लिए उन्होंने जातक कथाओं (Buddhist stories) और अभिलेखों का अध्ययन किया।
  • इन कथाओं में बताया गया है कि कुछ राजा बहुत कठोर (harsh) थे।
  • राजा के अधिकारी लोगों से जबरन कर (tax) वसूलते थे।
  • किसान, पशुपालक और गाँव के लोग इन अधिकारियों से डरते थे।
  • कई बार लोग गाँव छोड़कर जंगलों में छिप जाते थे।

📝 गंदतिंदु जातक की कहानी

  • इस कहानी में राजा भेष बदलकर जनता की राय जानने निकला।
  • लोगों ने राजा और अधिकारियों की बुराई की।
  • इससे पता चलता है कि ग्रामीण जनता हमेशा शासकों से खुश नहीं थी।

मुख्य बात

  • राज्य को अधिक कर और उपज चाहिए थी।
  • इसलिए किसानों पर ज्यादा उत्पादन करने का दबाव बढ़ा।

5.2 उपज बढ़ाने के तरीके 🌱

खेती की उपज बढ़ाने के लिए कई नई तकनीकें अपनाई गईं।

1️ धान की रोपाई (Transplantation)

  • पहले धान के पौधे अलग उगाए जाते थे।
  • बाद में उन्हें खेतों में रोपा जाता था।
  • इससे पौधों को अधिक पोषण मिलता था।
  • परिणामधान की पैदावार बढ़ जाती थी।

2️ लोहे के फाल वाला हल 🚜

  • लोहे के फाल (iron ploughshare) वाले हल का प्रयोग शुरू हुआ।
  • इससे कठोर भूमि की जुताई आसान हो गई।
  • पंजाब और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में इसका अधिक उपयोग हुआ।

3️ सिंचाई के साधन 💧

  • कुएँ, तालाब और नहरें बनाई गईं।
  • किसान और गाँव के लोग मिलकर सिंचाई व्यवस्था बनाते थे।
  • कुछ कार्य शासकों द्वारा भी करवाए जाते थे।

परिणाम

  • खेती का उत्पादन बढ़ा।
  • गाँवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।

5.3 ग्रामीण समाज में विभिन्नताएँ ⚖️

  • खेती में वृद्धि होने से सभी लोगों को बराबर लाभ नहीं मिला।
  • समाज में अमीर और गरीब किसानों का अंतर बढ़ने लगा।

👨‍🌾 ग्रामीण समाज के वर्ग

🔹 बड़े जमींदार

  • तमिल साहित्य में इन्हें वेल्लालर (Vellalar) कहा गया है।
  • इनके पास बड़ी मात्रा में भूमि होती थी।

🔹 छोटे किसान

  • इन्हें उल्वर (Uzhavar) कहा गया।
  • ये खुद खेती करते थे।

🔹 भूमिहीन मजदूर

  • इनके पास अपनी जमीन नहीं होती थी।
  • ये दूसरों के खेतों में काम करते थे।

मुख्य बात

  • भूमि (land) और श्रम (labour) के आधार पर समाज में भेदभाव बढ़ा।
  • ग्रामीण समाज में असमानता दिखाई देने लगी।

5.4 भूमिदान और नए अभिजात ग्रामीण 📜

  • प्रारंभिक भारत में राजाओं द्वारा भूमि दान (land grant) देने की प्रथा बढ़ी।
  • भूमि दान अधिकतर ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थाओं को दिया जाता था।
  • इन दानों का उल्लेख ताम्रपत्रों (copper plates) और अभिलेखों में मिलता है।

👑 प्रभावती गुप्त

  • प्रभावती गुप्त गुप्त वंश की प्रसिद्ध महिला शासक थीं।
  • उन्होंने ब्राह्मणों को भूमि दान दी।

📌 भूमि पाने वालों के अधिकार

  • वे किसानों से कर वसूल सकते थे।
  • गाँव के लोग उनके आदेश मानने के लिए बाध्य थे।
  • उन्हें कई प्रकार के करों से छूट भी मिलती थी।

परिणाम

  • गाँवों में नए शक्तिशाली वर्ग (powerful class) का विकास हुआ।
  • किसानों पर नियंत्रण बढ़ गया।

स्रोत 5 : गुजरात की सुदर्शन झील 🌊

  • सुदर्शन झील एक कृत्रिम जलाशय (artificial reservoir) थी।
  • इसका निर्माण सिंचाई के लिए किया गया था।
  • बाद में शासक रुद्रदामन ने इसकी मरम्मत करवाई।
  • इससे खेती को बहुत लाभ मिला।
  • यह सिंचाई व्यवस्था के महत्व को दर्शाती है।

स्रोत 6 : सीमाओं का महत्व 🗺️

  • मनुस्मृति में गाँवों की सीमाओं का वर्णन मिलता है।
  • सीमाएँ तय करने के लिए पेड़, पत्थर, कुएँ और नदियों का उपयोग होता था।
  • सीमाएँ भूमि विवाद रोकने में मदद करती थीं।
  • इससे लोगों को अपनी भूमि की पहचान मिलती थी।

एक छोटे गाँव का जीवन 🏡

  • गाँव के लोग खेती और पशुपालन करते थे।
  • जंगलों से लकड़ी, फल, शहद और जड़ी-बूटियाँ मिलती थीं।
  • महिलाएँ भी गाँव की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
  • लोग बैलगाड़ियों और पशुओं का उपयोग करते थे।
  • गाँव काफी हद तक आत्मनिर्भर (self-sufficient) थे।

स्रोत 8 : प्रभावती गुप्त और दंगुन गाँव 📖

  • प्रभावती गुप्त ने ब्राह्मणों को गाँव दान में दिया।
  • दान पाने वालों को कर वसूलने का अधिकार मिला।
  • किसानों को उनके आदेश मानने पड़ते थे।
  • कुछ करों से उन्हें छूट भी दी गई।
  • यह अभिलेख भूमिदान प्रथा की महत्वपूर्ण जानकारी देता है।

6. नगर एवं व्यापार 🏙️

6.1 नए नगर 🌆

  • लगभग छठी शताब्दी .पू. से कई नए नगरों का विकास होने लगा।
  • ये नगर प्रशासन (administration), व्यापार (trade) और शिल्प (crafts) के प्रमुख केंद्र थे।
  • अधिकांश नगर महाजनपदों की राजधानियाँ थे।
  • कुछ नगर नदियों के किनारे बसे थे, जिससे व्यापार आसान होता था।
  • नगरों में व्यापारी, कारीगर, अधिकारी और शासक रहते थे।
  • नगर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र बन गए।

पाटलिपुत्र का इतिहास 🏛️

  • पाटलिपुत्र का विकास पाटलिग्राम नामक गाँव से हुआ।
  • मगध शासकों ने इसे राजधानी बनाया।
  • यह गंगा और सोन नदियों के संगम के पास स्थित था।
  • इसकी स्थिति व्यापार और परिवहन के लिए बहुत लाभदायक थी।
  • मौर्य साम्राज्य के समय यह बहुत प्रसिद्ध नगर बना।
  • यहाँ की जनसंख्या भी काफी अधिक थी।

6.2 नगरीय जनसंख्या : संरचना एवं आजीविका 👥

  • नगरों में विभिन्न प्रकार के लोग रहते थे।
  • पुरातात्विक साक्ष्यों से नगरों के जीवन की जानकारी मिलती है।

🏺 उत्तरी कृष्ण मृद्भांड (NBPW)

  • ये चमकदार काले रंग के बर्तन थे।
  • इन्हें अमीर लोग उपयोग करते थे।

⚒️ नगरों में रहने वाले लोग

  • सुनार (goldsmith)
  • लोहार (blacksmith)
  • बढ़ई (carpenter)
  • कुम्हार (potter)
  • व्यापारी (merchant)
  • अधिकारी (official)
  • धार्मिक गुरु

🏢 श्रेणियाँ (Guilds)

  • कारीगर और व्यापारी श्रेणियों में संगठित होते थे।
  • श्रेणियाँ वस्तुओं के उत्पादन और व्यापार को नियंत्रित करती थीं।
  • इनके प्रमुख कोश्रेणीपतिकहा जाता था।

मुख्य बात

  • नगरों में व्यापार और शिल्प तेजी से विकसित हुए।

6.3 उपमहाद्वीप और बाहर का व्यापार 🚢

  • भारत का व्यापार मध्य एशिया, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ था।
  • समुद्री और स्थल दोनों मार्गों से व्यापार होता था।

🌊 समुद्री व्यापार

  • व्यापारी जहाजों द्वारा दूर देशों तक जाते थे।
  • अरब सागर के रास्ते पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका तक संपर्क था।
  • बंगाल की खाड़ी के रास्ते दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन से व्यापार होता था।

🛣️ स्थल मार्ग

  • व्यापारी बैलगाड़ियों और पशुओं के काफिलों से यात्रा करते थे।
  • लंबी यात्राएँ कठिन लेकिन लाभदायक होती थीं।

📦 व्यापार की वस्तुएँ

भारत से बाहर जाने वाली वस्तुएँ

  • मसाले 🌶️
  • कपड़े 👕
  • जड़ी-बूटियाँ 🌿
  • हाथीदाँत 🐘
  • रत्न 💎

बाहर से आने वाली वस्तुएँ

  • सोना 🪙
  • चाँदी
  • काँच
  • घोड़े 🐎

स्रोत 9 : मालाबार तट (आधुनिक केरल) 🌴

  • मालाबार तट समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था।
  • यहाँ काली मिर्च (black pepper) की बहुत माँग थी।
  • व्यापारी यहाँ से मसाले खरीदकर विदेश ले जाते थे।
  • रोमन साम्राज्य के साथ भी व्यापार होता था।
  • यहाँ बंदरगाहों के माध्यम से विदेशी व्यापार बढ़ा।

मुख्य बात

  • मालाबार तट भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख क्षेत्र था।

6.4 सिक्के और राजा 🪙

  • व्यापार के विकास के साथ सिक्कों का उपयोग बढ़ा।
  • सबसे पहले आहत सिक्के (Punch-marked coins) चलन में आए।
  • ये अधिकतर चाँदी और ताँबे के बने होते थे।
  • इन पर विभिन्न चिन्ह बनाए जाते थे।

👑 शासकों द्वारा जारी सिक्के

  • कुषाण शासकों ने सोने के सिक्के जारी किए।
  • गुप्त शासकों के सिक्के बहुत सुंदर और शुद्ध सोने के थे।
  • सिक्कों से व्यापार और कर वसूली आसान हुई।

⚠️ छठी शताब्दी . के बाद

  • सोने के सिक्कों की संख्या कम होने लगी।
  • कुछ इतिहासकार इसे व्यापार में गिरावट का संकेत मानते हैं।
  • अन्य इतिहासकार मानते हैं कि व्यापार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।

📚 मुद्राशास्त्र (Numismatics)

  • सिक्कों के अध्ययन को मुद्राशास्त्र कहते हैं।
  • इससे इतिहासकारों को व्यापार, अर्थव्यवस्था और शासकों की जानकारी मिलती है।

चित्र 2.6 : एक प्रतिमा की भेंट 🗿

  • मथुरा से प्राप्त अभिलेख से पता चलता है कि एक स्त्री ने प्रतिमा भेंट की थी।
  • इससे धार्मिक दान की परंपरा का पता चलता है।

चित्र 2.7 : आहत सिक्का 🪙

  • आहत सिक्कों पर प्रतीकों को ठोककर बनाया जाता था।
  • ये भारत के प्रारंभिक सिक्कों में शामिल थे।

7. मूल बातें 📜

अभिलेखों का अर्थ कैसे निकाला जाता है? 🔍

  • इतिहासकार केवल अभिलेख ढूँढते ही नहीं, बल्कि उनका अर्थ भी समझने की कोशिश करते हैं।
  • अभिलेखों में प्रयुक्त लिपि (script) और भाषा को पढ़ना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
  • कई अभिलेख समय के साथ टूट-फूट गए, इसलिए उन्हें पढ़ना कठिन है।
  • इतिहासकार अक्षरों, शब्दों और प्रतीकों की तुलना करके अर्थ निकालते हैं।

7.1 ब्राह्मी लिपि का अध्ययन ✍️

  • प्राचीन भारत की सबसे महत्वपूर्ण लिपियों में ब्राह्मी लिपि शामिल थी।
  • अशोक के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए थे।
  • आधुनिक विद्वानों ने ब्राह्मी अक्षरों की तुलना देवनागरी अक्षरों से की।

👨‍🏫 जेम्स प्रिंसेप का योगदान

  • 1838 . में जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी लिपि को पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
  • इसके बाद अशोक के अभिलेखों को समझना संभव हुआ।

मुख्य बात

  • ब्राह्मी लिपि को पढ़ने से प्राचीन भारतीय इतिहास की नई जानकारी मिली।

7.2 खरोष्ठी लिपि को कैसे पढ़ा गया? 📝

  • खरोष्ठी लिपि उत्तर-पश्चिम भारत में प्रचलित थी।
  • यह दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी।
  • विद्वानों ने यूनानी और खरोष्ठी सिक्कों की तुलना करके इसे पढ़ा।
  • इससे शासकों के नाम और इतिहास समझने में मदद मिली।

स्रोत 10 : राजा के आदेश 👑

  • अशोक के अभिलेखों में उनके आदेश लिखे गए हैं।
  • वेदेवानंपिय पियदस्सीनाम से स्वयं को संबोधित करते थे।
  • अशोक ने धर्म (Dhamma) के पालन पर जोर दिया।
  • उन्होंने प्रजा की भलाई और नैतिक जीवन पर बल दिया।
  • अभिलेखों को जनता तक संदेश पहुँचाने का माध्यम बनाया गया।

स्रोत 11 : राजा की वेदना 😔

  • कलिंग युद्ध के बाद अशोक को भारी दुख हुआ।
  • युद्ध में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए।
  • इसके बाद अशोक ने हिंसा छोड़कर धम्म नीति अपनाई।
  • उन्होंने शांति और करुणा का संदेश दिया।

परिणाम

  • अशोक ने विजय की जगह नैतिक शासन को महत्व दिया।

इतिहासकार अभिलेखों को कैसे समझते हैं? 📖

🔹 महत्वपूर्ण तरीके

1️ भाषा और लिपि का अध्ययन
2️ अन्य अभिलेखों से तुलना
3️ सिक्कों और पुरातात्विक साक्ष्यों का उपयोग
4️ शब्दों और प्रतीकों का विश्लेषण

⚠️ कठिनाइयाँ

  • कई अभिलेख अधूरे होते हैं।
  • कुछ शब्दों का अर्थ स्पष्ट नहीं होता।
  • अलग-अलग क्षेत्रों की भाषाएँ अलग थीं।

8. अभिलेख साक्ष्य की सीमा ⚖️

  • अभिलेखों से हमें महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी मिलती है।
  • लेकिन उनकी अपनी सीमाएँ भी होती हैं।

सीमाएँ

  • सभी अभिलेख सुरक्षित नहीं बचे हैं।
  • कई अभिलेख टूट गए या मिट गए।
  • अभिलेख अधिकतर शासकों और धनी लोगों के बारे में बताते हैं।
  • सामान्य लोगों के जीवन की जानकारी कम मिलती है।

📌 इतिहासकार क्या करते हैं?

  • इतिहासकार अभिलेखों की तुलना अन्य स्रोतों से करते हैं।
  • साहित्य, सिक्के और पुरातत्व की मदद से इतिहास को समझते हैं।

मुख्य बात

  • केवल अभिलेखों के आधार पर पूरा इतिहास नहीं जाना जा सकता।
  • इतिहास समझने के लिए कई प्रकार के स्रोतों की आवश्यकता होती है।

चित्र 2.8 : ताँबे का सिक्का 🪙

  • प्राचीन काल में ताँबे के सिक्कों का उपयोग व्यापार में किया जाता था।

चित्र 2.9 : गुप्त सिक्का 🪙

  • गुप्त शासकों ने सुंदर सोने के सिक्के जारी किए।
  • ये उनकी आर्थिक समृद्धि को दर्शाते हैं।

चित्र 2.10 : अशोक का एक अभिलेख 🪨

  • अशोक ने अपने संदेश पत्थरों और स्तंभों पर खुदवाए।
  • इन अभिलेखों से उनके शासन और धम्म नीति की जानकारी मिलती है।

चित्र 2.11 : ब्राह्मी और देवनागरी अक्षर 🔠

  • विद्वानों ने ब्राह्मी अक्षरों की तुलना देवनागरी से करके उन्हें पढ़ा।

चित्र 2.12 : हिंद-यूनानी शासक मेनांडर का सिक्का 🪙

  • इस सिक्के पर यूनानी और भारतीय दोनों प्रभाव दिखाई देते हैं।
  • इससे विदेशी संपर्क और व्यापार का पता चलता है।

चित्र 2.13 : ताम्रपत्र लेख 📜

  • ताम्रपत्रों पर भूमि दान और राजकीय आदेश लिखे जाते थे।
  • ये प्रशासन और समाज की जानकारी देते हैं।

 

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